कल्पनाशब्दों के बीच
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मुकेश कुमार सिन्हा आप मेरे उन मित्रों में हैं जिन्होंने मु…

मुकेश कुमार सिन्हा आप मेरे उन मित्रों में हैं जिन्होंने मुझे लेखनी की राह दिखाई। जितनी भी पत्रिकाओं में छपी हूं सब आपके भेजें हुए पते हैं। @कल्पना लाइव के लिए आपके शब्द अनमोल हैं। आभारी हमेशा रहूंगी। शब्द बंधन बंधा रहे। कल्पना Kalpana Pandey का कविता संग्रह बुक फेयर में लिया था। इसका कवरपेज मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया। एक नर्तकी के आलता युक्त खूबसूरत पैर के साथ डिजिटल नाम "@कल्पना लाइव" का कॉम्बिनेशन, बेहद आकर्षक है। फिर इसके फ्लैप पर किशोर चौधरी कहते हैं कल्पना पांडे की कविताएं कविता करना न होकर प्रेम करना है। फिर ये भी कहते हैं कि इनकी कविताएँ कुछ ऐसी है जैसे प्रेम के दिनों का फूल जो सूख गया, उसे एक शुकराने के साथ लौटा रहे हैं। वैसे तो कल्पना के कविताओं में प्रकृति है, पिता है, जिंदादिली है, स्त्री भी है, पर प्रेम हर पन्ने में पसरा है, जो पाठक को गुलाबी शब्दों की दुनिया में ले जाता है। कल्पना अपने शब्दों में कहती हैं : कल्पना और यथार्थ के बीच सच्चे कदमों से अपना अस्तित्व लिखने की चाह है... इतनी सी तो ख्वाइश है.... क्या ये अथाह है? उसे चुनो... जिसे चुन सकते हो अंगुलियों से मैंने चुना "कल्पना" को कल्पना के कैनवास में शब्दों का गुलाबी रूमान और जीवंत होते प्लॉट से शब्द समूह, आकर्षित करते हैं तभी तो पहले पन्ने पर ही लिखती हैं ये शब्दों के हरश्रृंगार उन सबके लिए जो कल्पना से कविता का बसंत रच सकते हैं। कल्पना की कविता : तुम्हारे आने से बहुत देर पहले से और तुम्हारे जाने के बहुत देर बाद तक शब्द मौन रखते हैं इस बीच ढेर सारी कल्पनाएं होती है सुनो, जाते हुए मुझसे उतारकर अपनी पसंदीदा कविता ले जाना.... एपीएन पब्लिकेशन से प्रकाशित हार्ड बाउंड संग्रह 220/- में उपलब्ध है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें