मौन सा प्रश्न वाचाल हर तंज बनी है नारी अकेला चाँद तारों की अनबन सिसका घर एक सारथि रौशनी पे सवार हांके है तम नेमत खुदा सबको ही बक्श्ता प्यारी सी माँ