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रचना 1735

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पिछले दिन की देह त्याग कर मैं रोज़ नए मन को जन्म देती हूँ।

पिछले दिन की देह त्याग कर मैं रोज़ नए मन को जन्म देती हूँ। अपनी उम्र मैं खुद तय करती हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें