भाषा / Language
इस प्यार को क्या नाम दूँ
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इस प्यार को क्या नाम दूँ?
हम अपने भीतर ही कितने बंटे हुए होते हैं पर आज इन सब से मिलें... ये सारे भव्या के होस्टल mates हैं भारत, पाकिस्तान ,जर्मनी और वियतनाम को बिना किसी सीमा के जुड़े हुए मैं पिछले कुछ दिनों से रोज़ देख रही हूँ ।ये सब अलग अलग व्यक्तित्व अलग अलग सपने देखते हैं ...पर जाने क्या है जो अलग भाषा ,अलग देश, अलग रहनसहन के बावजूद साथ में खाते, पीते, पढ़ते और chill out करते हैं।कोई बैचलर्स तो कोई मास्टर्स कर रहा। किसी का किसी से कोई पढ़ाई का subject मिलता नहीं पर सब एक दूसरे के लिए ऐसा मजबूत परिवार बने हैं कि क्या बताऊँ। दोस्ती भी क्या चीज़ बनाई है खुदा ने।
ये एक दूसरे को जितना परेशान कर लें पर एक दूसरे को नाराज़ नहीं होने देते। घर से दूर अदृश्य रिश्ते दिखे इन सब में। जिस तरह से ये एक दूसरे को अपने अपने assignments में मदद करते हैं या emotional balance कायम रखते हैं ...देखते ही बनता है।रूठना मनाना तो आम बात है।
इन कुछ दिनों में मैं माँ तो भव्या की थी पर इन सबकी aunty ज्यादा थी। सब को अपने हाथ का घर का खाना खिलाया। साथ में घूमें।सुख.... वाकई इसे कहते हैं।
हारिस अहमद और अली तुमको जी भर दुआएं । तुम में मुझे दो बड़े बेटे दिखे। इस प्यार और मिठास के लिए तुम्हारे अम्मी अब्बू की दी हुई तरबीयत के सामने सम्मान में सर झुकाने का मन है। आबाद रहो।
प्रत्योय,रामकी,गुलनीत,अरमान, स्नेहा,निष्ठा, सुष्मिता और भव्या खूब आगे बढ़ो।खूब ख़्वाब सजाओ।
Bruno from germany
Bill and steve from vietnaam god bless u all. Stay connected
तुम सबके चेहरों की खुशी बनी रहे। कल वापस लौट रही पर "इतना सारा "सुकून साथ ले जा रही ।जानती हूँ तुम सब आपस में एक दूसरे को थामे रहोगे।
दो दिन बाद है मेरा जन्मदिन पर आज से ही मनाया जा रहा।कुछ देर पहले अपने देश से एक नायाब तोहफ़ा मिला और अब यहाँ अभी इन सारे बच्चों से । ईश्वर इन सबके साथ रहे।
love u all ..
Thank u for being family to me and bhavya 😊😊😊
God bless..
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें