कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1710

भाषा / Language

बेक़ाबू

बेक़ाबू... ये समन्दर ये हवा ये मैं मैं देखूँ जो तुझको तो प्यास बढ़े ... तू रोज़ तू रोज़ दो घूँट चढ़े। ये जो हल्का हल्का सुरुर है 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें