कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1680

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तुम्हें लकीरों में नहीं

तुम्हें लकीरों में नहीं ....... अपने इंतज़ार में जगह दी है बेपनाह ...... बेइंतहां......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें