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रचना 1679

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उसका प्रेम लिखने का हुनर नायाब है...ऐसे कि जैसे मसीहा लिखा…

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उसका प्रेम लिखने का हुनर नायाब है...ऐसे कि जैसे मसीहा लिखा हो और दर्द पढ़ा जाए। हर बार उसे मैं यही दुआ देती हूँ कि उसका मसीहा आबाद रहे... कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें