कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1660

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हल ढूंढने जैसा है .....तुमसे मिलना ।

हल ढूंढने जैसा है .....तुमसे मिलना । दूर और पास मायने नहीं रखता अब । बस..... कुछ पल मैं .... और शायद फिर ....इक नयी ....मैं । "तुम " नहीं लिख रही ... "तुम" तो mandatory हो ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें