भाषा / Language
वो अद्धभुत महसूस करो
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वो अद्धभुत महसूस करो
ठीक उस घड़ी जब वो सामने हो रहा हो
रुको मत
हक़ भी न जमाओ
घुलने दो
उस पर अपना नाम न उकेरो
इस एकांत को सुनो....
अबकी जो तुम खो दोगे वो लौट कर नहीं आएगा
और वो जो छूट गया बस वही रह रह कर लौटेगा तुम्हारी परिधि में
फिर एक उदासी बन कर
दो आँसू एक हंसी रच कर
जादू होने को है
चूमते रहो इस पल की खूबसूरत उंगलियों को
सगरे प्रश्न गला दो
सारे उत्तर भी छिपा दो
एक बंधन चटकने को है
नीली स्याही से सफेद मन पर
कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें