भाषा / Language
शुक्रिया
✦
शुक्रिया ......
शुक्रिया उस रोज़ उस नज़र का
जो उठी और गढ़ गयी हम पर
इश्क का कारवां शुरू हमसे
ख़त्म भी हुआ हम पर
शुक्रिया उस रोज़ उन रंगों का
जो उड़े और निखर गए हम पर
सादगी में लिपटे हम थे
रंग मुहब्बत क्या फबा उन पर
शुक्रिया उस रोज़ उन धड़कनों का
जो संग धड़की और थम गयी पल भर
धक् धक् के शोर में कुछ सुना नहीं
मैं तो मर गयी कल्पना सुन कर
शुक्रिया उस रोज़ उन लम्हों का
जो कम थे फिर भी बिखरे हम पर
इक ज़िन्दगी उधार ली मैंने
वो भी उम्र वार गया हम पर
शुक्रिया उस रोज़ उस मंजर का
जो सजा और मिटा भी हम पर
जन्नतें रोज़ ही बसती होंगी
जाने के बाद भी वहाँ पर
शुक्रिया उस रोज़ उन इशारों का
जो गिरे प्रेम की बारिशों से हम पर
यादें आज भी चिढ़ाती हैं मुझे
मेरे इश्क की नकलें उतार कर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें