कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1582

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सुनो ! अगर कभी लौटे तो क्या मांगोगे मुझ से

सुनो ! अगर कभी लौटे तो क्या मांगोगे मुझ से? तुम्हारा स्पर्श वो क्यों? जानती हो ...स्पर्श प्रेम का सिर्फ और सिर्फ बचा रहने वाला पहला और आख़िरी गहना है। स्पर्श गहना है ? तसल्ली नहीं है क्या? नहीं.. गहना है ..संभाल और सहेज के परे आज पहली बार ये दोनों एक ही दिशा में देख रहे थे और एक दूसरे की नज़र में भी नहीं थे । और मैं बस उन्हें देख रही थी ... देखते हुए। डायरी में नई कहानी का नाम ..ग्यारहवीं दिशा लिख कर सो गई। Parellels don't part but sometimes Crossroads too end up parting ways. 😊😊😊 कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें