कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1581

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किताबों से भरे मेरे कमरे को कुछ कहना चाहोगी कल्पना

किताबों से भरे मेरे कमरे को कुछ कहना चाहोगी कल्पना ? किताबों से? हाँ तुम्हारी खुश्बू पहन लेती हूँ... तन्हाई का गुमां नहीं रहता 😊😊😊😊 कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें