ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1575

भाषा / Language

जितनी कविता तुम तक पहुँचती है बस वही सार्थक शब्द हैं बाक़ी स…

✦
जितनी कविता तुम तक पहुँचती है बस वही सार्थक शब्द हैं बाक़ी सब तो बचा हुआ मेरा अथाह प्रेम l प्रेम हर आकार , हर रंग , हर महक, हर प्रकार में आता है .... चुनो उसे .......जिसे तुम जीना चाहते हो। क्योंकि मैं कल्पना हूँ मेरा अद्धभुत "क" से ही शुरू होता है । जैसे कहानी जैसे कविता जैसे...... तुम्हारे शहर में इतनी तो जगह होगी ना कि मैं .. अपने जंगल अपना समुन्द्र अपने प्रश्न अपनी चुप और अपनी ये कलम रख सकूँ? कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें