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रचना 1554

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सफर और मंज़िल एक साथ तह लगाकर रखे हुए हैं

सफर और मंज़िल एक साथ तह लगाकर रखे हुए हैं ..... कितने खूबसूरत लग रहे तुम। 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें