कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1553

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लिख कर तो देखो .......मुझे इक बार

लिख कर तो देखो .......मुझे इक बार ..... इस ख़ामोश स्याही से उस खामोश पन्ने पर इस खामोश कलम से उन खामोश लफ़्ज़ों में घोल कर जो बड़ी ख़ामोशी से मेरी खामोशियों को बस खामोश करना जानते हैं बस आगोश करना जानते हैं इन खामोशियों को सुनो .... मैं .......खूबसूरत नज़र आती हूँ कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें