भाषा / Language
बंद आंखों से तुम्हें देखना और ठीक ऐसे ही तुम्हें सुनना
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बंद आंखों से तुम्हें देखना और ठीक ऐसे ही तुम्हें सुनना .....
मैं हमेशा कहती हूँ ....
मुस्कुराने के लिए तुम्हें सोचती और सुनती हुई दो आँखें चाहिए....
दो गुलाबी पंखुड़ियां तो सिर्फ़ जुड़ना जानती हैं...... आज़मा कर देखिए इन आँखों को।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें