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एक दिन के सुकून को बाक़ी तीन सौ चौसठ उदासियों में लिख देना .…

एक दिन के सुकून को बाक़ी तीन सौ चौसठ उदासियों में लिख देना .....प्रेम ही होता होगा शायद आज दो रंगों को बातें करते सुना.... मैं तो अंदाज़न कह रही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें