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रचना 1506

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राह में पंखुड़ियां तो अनगिनत हैं

राह में पंखुड़ियां तो अनगिनत हैं ...... पर वो क्या है ना मुझे कैक्टस में स्कोप ज्यादा दिखता है। उमींद का हरा रंग एक सा होता है। और चुभन का भूरा भी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें