भाषा / Language
Memories में मिली मेरी पसंदीदा एक पुरानी कल्पना 😊😊😊😊
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Memories में मिली मेरी पसंदीदा एक पुरानी कल्पना 😊😊😊😊
आप से तुम हुए ...........फिर गुम हो गए ....
मुद्दतों बाद ......आज मिले
लफ़्ज़ों ने कहा आप कहाँ खो गए ?
नज़रों ने कहा आप बूढ़े हो गए
दिमाग ने कहा अब तक कहाँ रह गए ?
जिगर बेसब्र खीज के बोला ....
कबख्तों चुप हो जाओ
हमें अकेला छोड़ दो
हम हमउम्र हो गए .
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें