कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1493

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तुम्हारे मेरे बीच के शहर इंतज़ार से बने हैं जो कविता की ज़ुबा…

तुम्हारे मेरे बीच के शहर इंतज़ार से बने हैं जो कविता की ज़ुबान बोलते और कहानियों के इशारे समझ जाते हैं। आज तुम्हारी भेजी आवाज़ मिली । अब सुकून है ..... शहर कविता कहानियों में डूबता रहे ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें