कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1489

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जो बूँद ......सागर लगे

जो बूँद ......सागर लगे और ... जो सागर..... बूँद बस ......वही इश्क़ है प्रेम आप सबको मुबारक ...😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें