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कल्पना पाण्डेय की कविताओं से रूबरू होते हुए
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कल्पना पाण्डेय की कविताओं से रूबरू होते हुए
कल्पना पाण्डेय की कविताओं का पहला
कविता संकलन मिला।मैं उन्हें पिछले कुछ वर्षों से
लगातार फ़ेस बुक के माध्यम से पढ़ रहा हूँ और समझ
भी रहा हूँ।उनकी कविता अधिकतर प्रेम से सराबोर
स्त्री के अभूतपूर्व प्रेम की कवितायें हैं।प्रेम को विभिन्न
विभिन्न दृष्टिकौन से देखने और समझने का उनका
अपना एक अनूठा ढंग है जो कविता के इतने क़रीब
पाठक को ले जाता है कि पाठक उसमें पूरी तरह डूब
जाता है।
स्त्री मनोविज्ञान में शायद उनका गहरा अध्ययन
उन्हें ऐसी कविताओं में उतार कर दूर तक ले जाता है।जैसे
“अरे सुनो '
अद्भुत देखा नहीं....बस छुआ जा सकता है
जब कि मैं तो चाँद की फाँक हूँ
या
“ तुम भी न............
हुबहू
उस बादल की तरह हो
जो अनकहा प्रेम
बूँदों भरा बैठा हो मेरे लिये
इस तरह की बेहतरीन और ख़ूबसूरत कविताओं
से संकलन भरा पड़ा है।कुछेक कविताएँ कल्पना चंद पंक्ति
में ही कह देती हैं।हालाँकि इस समय बहुत सी महिला रचनाकार
कवितायें लिख ,कह रही हैं किंतु कल्पना पाण्डेय का अपना एक
अलगऔर विशिष्ट शिल्प उभरकर सामने आया है जो उनकी
आगे चलकर पहचान का भी काम करेगा।हिन्दी कविता जगत
में इस संकलन का स्वागत होना चाहिये ताकि कवियत्री को
अपने अगले संकलन में कुछ और बेहतर करने का प्रोत्साहन
मिल सके।
कल्पना पाण्डेय के इस कविता संकलन “कल्पना
लाइव “ को मेरी ढेरों शुभकामनायें। पाठक जगत इस किताब की
बेहतरीन कविताओं से जुड़कर अपने आप को सार्थकता के क़रीब
पायेंगे।इसी आशा के साथ
-कृष्ण बक्षी
*बहुत बहुत आभार Krishan Bakshi sir💐💐💐💐💐 आपके शब्दों के लिए दिल से शुक्रिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें