कल्पनाशब्दों के बीच
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Celebration

Celebration.... उदासियों को सबसे पसंद कौन सा शब्द होगा? उसने पूछा... "बेवज़ह " लड़की ने बिना सोचे समझे कह दिया। वह मुस्कुराया ...कुछ देर लड़की को बस देखता ही रहा। कुछ देर मुझे सुन सकोगी ? बाद इसके वह अपना पूरा प्रेम उसे सुनाता गया ,इस बात से बेखबर कि हर बात को कहने से पहले वो "बेवजह" कह रहा है। जितनी बार उसने बेवजह कहा वो और ज्यादा प्रेमी दिखा उस लड़की को । उस शाम लड़की बस उसे सुनती रही और जाने कब अपनी चेकलिस्ट से मैच करने लगी। उसके बेवजह लड़की की लिस्ट से उन्नीस बीस ही थे। मैं बेवजह ही उससे मिली । उसने मुझे बेवजह खुद से मिलने दिया। हम बेवजह बात करने लगे । बेवजह हम एक दूसरे को ढूंढने लगे। बेवजह मैंने उसके लिखे प्रेम में शब्द ढूंढे ।बेवजह हम एक दूसरे को भले -भले कोसे- कोसेे लगे। बेवजह हम रुके ।बेवजह कुछ दूर चले भी। बेवजह हमने एक दूसरे को अपने हिस्से से बांटा । बेवजह हमने एक दूसरे को आवाज़ दी। हम रूठे भी कई बार बेवजह। बेवजह हम टूटे भी। बेवजह लोग हमारे बीच उग आए।बेवजह हम छिपते फिरे। बेवजह हम छूट गए । हमारे बीच बहुत सारा अबोला रहा बेवजह।बेवजह हम बोल नहीं पाए। हम चल नहीं पाए साथ ....शायद बेवजह ही।हमने बेवजह कोशिश की। हम हारते रहे बेवजह।हमने छोड़ दिया मोह बेवजह।हमने रास्ते चुने ...दिल छोड़ दिये बेवजह। उसकी हथेलियाँ गर्म थी और उस लड़की की ठंडी ...इतने सारे अपने अपने बेवजह रोके हुए जो बैठे थे दरमियां। दो लोगों के रास्ते अलग हो पर साथ ढ़ेर सारा "बेवजह " हो तो दोस्ती लंबी चलेगी....शायद यही सोच कर वो दोनों पास आये और हथेलियाँ खोल दी। अब बेवजह मुस्कुराहटें थी और अपनी अपनी उदासियों को दोनों स्ट्रॉ में सिप by सिप कॉफ़ी में घोल कर पी गए बिना उस पर बने हुए दिल को घोले हुए। chill यार buddy.... let's celebrate our "बेवजह" ...let it always mean उदासियाँ for us but love rocks .... दोस्ती rocks.... cheers 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें