कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1456

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आज मेले में उनसे मिलने का मन था जिनसे प्रेम करती हूँ

आज मेले में उनसे मिलने का मन था जिनसे प्रेम करती हूँ .... मुझे अमृता जी मिली। वहीं कुछ ये लिख डाला.... सुनो स्त्री! वक़्त के लिहाफ़ से एक बालिश्त जिजीविषा रोज़ नोच कर बन जाती हो तुम धुरी ऐसे ही थोड़े दिन का चक्का घूमता है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें