भाषा / Language
टूटी हुई कविता को
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टूटी हुई कविता को
फिर से लिखने के लिए
शब्द नहीं...... शऊर चाहिए
शऊर चाहिए .....
उसकी खामोशियों को बीनने का
बीनी हुई खामोशियों से
बेकार खामोशियों को काटने छांटने का
छांट काट कर....
इक नयी ख़ामोशी गढ़ने का
उस नयी ख़ामोशी को शब्दों से लीपने का
लीपे हुए खामोश शब्दों को
उस टूटी कविता में फिर जोड़ देने का
सच..... शऊर चाहिए
टूटी हुई कविता को .....
सिर्फ और सिर्फ ..... ख़ामोशी से सजाने का
इक बार फिर कागज़ दिखाने का
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें