भाषा / Language
इश्क़ वाली याद
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इश्क़ वाली याद....
क्या होना चाहोगी कल्पना मेरे लिए ? एक रोज़ इश्क़ वाली याद ने पूछा
घड़ी का वो खराब पेंडुलम जो सिर्फ़ पीछे की तरफ़ बढ़े। वक़्त कुछ यूं थामे रखने की ख्वाइश है.....
बस तुम्हारे लिए
और एक गीत होठों पर.... नहीं आंखों में
अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं ।
सुनो ... गा कर सुनाऊं क्या?
इश्क़ में आवाज़ मीठी है आज भी मेरी ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें