रात में से अपना दिन भींच देने की प्यास और दिन में से अपनी रात सींच देने की आस ही मेरी कविता है।
रचना 14267 दिसंबर 2018भाषा / Languageहिन्दीEnglishरात में से अपना दिन भींच देने की प्यास और दिन में से अपनी र…✦रात में से अपना दिन भींच देने की प्यास और दिन में से अपनी रात सींच देने की आस ही मेरी कविता है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें