भाषा / Language
लघु कहानी... घरौंदा
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लघु कहानी... घरौंदा
सुनो!
बहुत दिनों से लिखना चाह रही थी कि परदेश में जब तुम अकेले रेत उठा लेते हो तो यहां मेरे साथ पहाड़ तो उठा ही सकते हो।
आ जाओ ना वापस। घर याद कर रहा।
तुम्हारी ......
पहाड़न
आज पहाड़ पर रेत का एक घरौंदा कम हुआ। पहाड़ झूम रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें