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रचना 1398

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उस ज्यादातर ख़ाली और पूरे भरे से कमरे में एक रेशा धूप का आना

उस ज्यादातर ख़ाली और पूरे भरे से कमरे में एक रेशा धूप का आना... अहा ... हूबहू तुम 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें