भाषा / Language
जब तक कि मैं वो दास्तां समेट पाती
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जब तक कि मैं वो दास्तां समेट पाती ....
तुमने कुछ शब्द बहा दिए
कुछ जला दिए
अधूरी कहानियों को सीने वाले शब्द....
कहीं तो मिलते ही होंगे बाज़ार में
आज कलम...... कुछ ख़ास बिनेगी
अद्धभुत चित्र और सोच के लिए Farha Nazeer जी तहे दिल से दाद पहुंचे।
I am fan of yours.💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें