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तुम्हारे पास आने से नहीं ....तुम्हारे अकेले लौट जाने से डर…

तुम्हारे पास आने से नहीं ....तुम्हारे अकेले लौट जाने से डर लगता है। तब तक.... चाँद तुमको दूर से देखने का अपना सुकून है। डर का क्या है ? एक दिन वो भी पिघल ही जाएगा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें