भाषा / Language
अरज़
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अरज़......
सुनो ......
कुछ कहते क्यों नहीं ?
अलफ़ाज़ चटक गए हैं क्या.....
हमारे बीच ?
ये चुप्पी ......
पाला क्यों बदल रही है आज ?
सुनो ...... देखो ना .....
इस नाराज़गी को .....
इस ख़ामोशी को ....
दूर तलक क्या ले जाना ?
और क्यूँ ले जाना ?
आज बस भी करो ....
कल ढूँढ लेना ....
मुझसे रूठ जाने का
मुझसे दूर जाने का
फिर कोई नया बहाना
सुनो ना .......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें