भाषा / Language
"मैं परछाई हूँ
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"मैं परछाई हूँ "......
हाँ .....सच है
"ख्वाब" ही तो हो तुम .....
बहुत दूर ...बस चमकते हुए
वो जलते हुए "सूरज"
जन्मों से .....
तुमसे ही तो है मेरा वजूद
मैं कौन ?
अरे ! मैं ....."परछाई"
नहीं पहचान सकोगे .....
तवज्जो ही कहाँ दी तुमने कभी ?
नज़र भर देखा ही कहाँ मुझे ?
आज....
जी में आता है ....न आने दूं
हर उस "चीज़" को अपने बीच
जिसकी "मैं परछाई हूँ "
कि इक पल मुझे भी तुम .....
असमानी झूले पर बैठा सको
दिखा सको ....
इक वो भी पहलु ज़िन्दगी का ....
जो "मुकम्मल" है
मेरी तरह ....."मोहताज़" नहीं
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें