भाषा / Language
फूंक दो ना .....कुछ टुकड़े हवा मुझ पर
✦
फूंक दो ना .....कुछ टुकड़े हवा मुझ पर
रख दो ना ....कुछ चुटकी धूप यहाँ
गिरने दो ना .....कुछ मुट्ठी जल मुझ पर
आज ....
इस कल्पना की मिटटी पर ....
रस भरे .....शब्द उगाने की जिद्द है
शब्दों का बसंत ......जीना चाहती हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें