कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1306

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दो बून्द इश्क़ तुम्हारी सिगरेट में जला ......फिर बुझ गया।बस…

दो बून्द इश्क़ तुम्हारी सिगरेट में जला ......फिर बुझ गया।बस उसी धुएं से कॉफी के दोनों मग भर गए । हर बार खता लफ़्ज़ ही नहीं करते । अबकी ये वाला खत नैनों ने नैनों को लिखा। कॉफी टेबल उस रोज से अकेला हुआ ही नहीं कभी...... Background में शायद यही गाना बज रहा था.... तू नज़्म नज़्म सा मेरे होठों पर ठहर जा... तू इश्क़ इश्क़ सा मेरी रूह में आकर बस जा..... सुनियेगा जरूर😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें