भाषा / Language
वह हर दिन
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वह हर दिन
जिंदगी हर दिन नई करवट लेती है
कभी खुशी ,कभी गम की आहट देती है
होठों पर कभी ढेर हंसी , कभी हल्की मुस्कुराहट होती है
माथे पर कभी वाकई , कभी बेवजह सलवट होती है
वह हर दिन बोझ सा , जब अंजाम में रुकावट होती है
वह हर दिन त्योहार सा ,जब थोड़ा करने पर सफलता झटपट होती है
वह हर दिन मायूस सा ,जब रिश्तों में खटपट होती है
वह हर दिन इम्तिहान सा ,जब यारों में हट –हट होती है
वह हर दिन बहार सा ,जब पुराने अहसासों को ताजगी की रुहानीयत होती है
वह हर दिन पाकीज़ सा ,जब सब कुछ कुर्बान करने की हैसियत होती है
वह हर दिन नापाक सा ,जब गैर हो या अपना ,छलने की नीयत होती है
वह हर दिन साज़िश सा ,जब झूठा ठहराया जाय ,वो जो असलियत होती है
वह हर दिन बुलबुला सा ,जब चंद पल चुरा कर अपनों को देने की सहूलियत होती है
वह हर दिन इंद्रधनुष सा ,जब यादों के धुंधले रंगों से पुरानी तस्वीर रंगने की फुर्सत होती है
वह हर दिन अंगारे सा ,जब उन जिगर के टुकड़ों से किसी के भी छूटने से दहशत होती है
वह हर दिन उधार सा, जब वही वही फिर फिर करने से बोरियत होती है
वह हर दिन सुकून सा, जब खुद को ढूंढ कर ,खुद से बातें कर लें ,ऐसी तबीयत होती है
वह हर दिन सफल सा ,जब हाथ रखते ही मिट्टी सोना और जीत सिर्फ हमारे नाम वसीयत होती है
वह हर दिन तन्हा सा ,जब दिल में अंधेरा और वक़्त की हमें उजाड़ने की क़ुव्वत होती है
वह हर दिन तजुर्बे सा ,जब दूसरों की गलतियों का ठीकरा अपने सर फूटने से फजीहत होती है
वह हर दिन बचपन सा, जब बच्चों संग शरारतों में उतर ,दिल में उनकी सी मासूमियत होती है
वह हर दिन आशीर्वाद सा ,जब दो पल ईश्वर और माँ-बाप दोनों के चरणों की इबादत होती है
सबका
अलग दिन अलग आज
अलग सुर अलग साज
अलग पहल अलग आगाज
अलग उम्मीद अलग परवाज़
जीने का अलग अलग अंदाज़
हर दिन –हर दिन कर रोज जान रहे हैं हम
इस छोटी सी जिंदगी के बड़े बड़े राज़
Memories में यह लिखा दिखा रहा ।
5 साल पहले जब कलम नई नई उठायी थी आज भी वही सच ....😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें