भाषा / Language
बहुत कोशिश करती हूँ कि कल्पना ही रहूं
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बहुत कोशिश करती हूँ कि कल्पना ही रहूं .....
शब्द न बनूं
फिर सोचती हूँ ....
मेरी कविता में खुद को ढूंढने वाला तुम्हारा Sudoku अधूरा रह जायेगा
दिनभर की थकान
चाय की प्याली की तह में ही चिपकी रह जायेगी
मुझे नींद नहीं आएगी
और
तुम सो नहीं पाओगे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें