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अतीत जब भी पलट कर लौटता है नया दुख लाता है।

अतीत जब भी पलट कर लौटता है नया दुख लाता है। पुरुष अपने अतीत के भय को पी नहीं पाता क्योंकि वो हमेशा से श्रेष्ठ बना रहना चाहता है। स्त्री अपने अतीत के भय को बार बार पीती है ताकि वर्तमान सींच सके। आसान प्रेम हमेशा से बुलबुला रहा है ये अलग बात है की ज्वार बड़े बड़े ला देता है। स्त्री जब तक आसान प्रेम ढो पाती है तब तक झुकी रहती है । जैसे ही पुरुष बोझ उतार कर हाथ झाड़ने लगता है... स्त्री धूल हो जाती है फिर धीरे धीरे रोज़ रोज़ एक बवंडर में बदल जाती है। ये बवंडर मैला अतीत , बंटा प्रेम ,अनकहा रिश्ता , आभासी संवेदना सब उड़ा ले जाता है। तब बाग़ी स्त्री सबसे ज्यादा ख़तरनाक होती है .....निहत्थी ही सही। वो कुछ भी नहीं करती बस पुरुष को अमानुष करके छोड़ जाती है...ये कह कर.... Echo का मतलब जानते हो ? ... "गूँज" अपने नाम की गूँज से तुम्हें श्रापित करती हूँ Vijayshree Tanveer ji की दूसरी शानदार कहानी भेड़िया .... मुझे भेड़िया कुछ ऐसा दिखाई दिया..😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें