कल्पनाशब्दों के बीच
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यूं ही रोज़ कहीं भी डूब जाने से कहीं बेहतर है

यूं ही रोज़ कहीं भी डूब जाने से कहीं बेहतर है .... अपने शब्दों की नाव को कागज़ पर उतार देना। इत्मिनान रखिये...... कल्पना डूबने नहीं देती। Keep floating with your desires... Life is yet to start the very next moment if u wish so......💐💐💐💐💐😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें