कल्पनाशब्दों के बीच
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इन आँखों में तुम्हारी नीली स्याही वाली तमाम कहानियां जम गयी…

इन आँखों में तुम्हारी नीली स्याही वाली तमाम कहानियां जम गयी हैं।हर शब्द के बाद वाला तुम्हारा रेगिस्तान मुझे बहा ले जाता है ......उस भूरे समुंदर के पास जो किताब के आखिरी पन्ने पर मेरी राह तक रहा है। वहीँ मिलते हो ना तुम अमूमन मुझे ? तुम्हारी कहानियों में तुम्हारे साथ रुकना ......चलना और फिर बस खत्म हो जाना अब मेरी चाहना है। इक कहानी में सैंकड़ों कहानियां मैं अपनी जोड़ रही हूँ जो अभी मेरे ज़ेहन में रुकी हैं। मिलने पर सौंप दूँगी तुम्हें ......ये आँखें।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें