कल्पनाशब्दों के बीच
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दूर तक काफिला है

दूर तक काफिला है ..... और सफ़र जारी है , यादों का .... हर मोड़ , हर दोराहे पर हर राह , हर चौराहे पर बे लफ्ज़ यादें हाथ हिलाती पूछती हैं क्या हुआ ? हमारे उन वादों का ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें