भाषा / Language
नयी उम्र
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नयी उम्र.......
आज मुद्दतों बाद
उसका दर सजा सा मिला
ख़्वाबों में मिला करता था
आज हक़ीक़त में मिला
बुढ़ाए ज़माने से धुंधली नज़र
मिलाता सा मिला
सब्र की झुर्रियों को
आँखों में सजाता सा मिला
वक़्त की बेवफाई को
अंगूठा दिखाता सा मिला
इश्क की सुफेदी पर
फख्र जताता सा मिला
मुद्तों बाद ......
इस नयी उम्र में
वो ......
अपने उनसे मिला
सच है....इश्क़ का रंग सफ़ेद है यारा....
इश्क़ का रंग सफ़ेद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें