कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1209

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"उदासी" को

"उदासी" को कागज़ के "नोटों "की तरह जेब में न रखो इन्हें "सिक्कों " की तरह उछाल दो कि इनकी खनक दूर तलक जाये और उसी गूँज में बैठ कर तेरे नाम की "ख़ुशी" धमक जाए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें