कल्पनाशब्दों के बीच
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तेवर हो ....या तरीका

तेवर हो ....या तरीका सब बेमायने हो जाते हैं तुझ तलक पहुंचकर सिर्फ...... मेरा मुकम्मल होना गूँजता रहता है दूर तक बहुत दूर तलक आज लहरों को चाँद से कहते सुना .... तुम भी यही सुन लो ना .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें