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बेशक़ अब मैं गुलाब नहीं उगाती पर मैं अपने कैक्टस जरूर काट दे…

बेशक़ अब मैं गुलाब नहीं उगाती पर मैं अपने कैक्टस जरूर काट देती हूँ.... शब्दों से
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें