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"मन"में ....... "घर"बना

"मन"में ....... "घर"बना मन में इक "आँगन" रख खुद संग वजूद दोनों लगा मन में इक "फर्श" रख ख्वाइश संग सुकून दोनों बिछा मन में इक "छत "रख बुलंदी संग नज़र दोनों टिका मन में इक "झरोखा "रख अहम् संग वहम दोनों गिरा मन में इक "किवाड़ "रख रिश्ते संग उमींद दोनों लिवा मन में इक "दीवार "रख इश्क संग ख्वाब दोनों टंगा मन में इक "कोना "रख परमात्मा संग आत्मा दोनों सजा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें