ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1155

भाषा / Language

सोचती थी बदल लूंगी तुमसे अपनी हसरतें

✦
सोचती थी बदल लूंगी तुमसे अपनी हसरतें ....... पर तुम तो मेरे ही कायल हो चले अब .....खुद को खुद से क्या बदलना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें