कल्पनाशब्दों के बीच
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सुनो ! मेरे हिस्से में समन्दर बहुत है

सुनो ! मेरे हिस्से में समन्दर बहुत है ..... लाओ ....अपना सूरज रख दो इक रूमानी शाम मैं भी पहन कर देखूं ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें