भाषा / Language
बेहद करीब से देखेंगे तो पाएंगे कि रोज़ हम सिर्फ अपने लिए ही…
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बेहद करीब से देखेंगे तो पाएंगे कि रोज़ हम सिर्फ अपने लिए ही लिखते हैं....फिर बस लिखते ही चले जाते हैं और एक दिन अपना ही लिखा यहां वहां रख कर भूल जाते हैं।
या फिर
बेहद करीब से देखेंगे तो पाएंगे कि रोज़ हम सिर्फ अपने लिए ही जीते हैं....फिर बस जीते ही चले जाते हैं और एक दिन अपना ही जीवन यहां वहां रख कर भूल जाते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें