कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम मुझे इस लिए भी पसंद हो कि बाहें फैलाये खड़े रहते हो।

तुम मुझे इस लिए भी पसंद हो कि बाहें फैलाये खड़े रहते हो। इन पहाड़ों पर जाओ तो लगता है प्रेम कितना सारा अभी लिखना बाकी है। घर,पहाड़ ,धुन्ध, बादल , फूल - पत्ते, मन और भी कितना कुछ छूना है। हफ्ता भर के लिए अल्मोड़ा आ रही.....मिलोगे ना? 😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें